कृष्ण भक्ति क्या है?

कृष्ण भक्ति का अर्थ है – भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निर्मल प्रेम, समर्पण और विश्वास रखना।
इसमें भक्त, श्रीकृष्ण को अपना मित्र, पुत्र, स्वामी या प्रियतम मानकर पूरे मन से उनकी आराधना करता है।


कृष्ण भक्ति के रूप (सनातन दृष्टि से)

🪔 कृष्ण भक्ति के रूप (सनातन दृष्टि से)

  1. बाल सखा भाव – जैसे गोपियों और गोपों ने नंदलाल को खेलते हुए देखा।
  2. मित्र भाव – जैसे अर्जुन ने कृष्ण को सारथी और सच्चा मित्र माना।
  3. मातृ भाव – जैसे यशोदा मैया ने कृष्ण को पुत्र मानकर पालना किया।
  4. दास भाव – जैसे सुदामा ने कृष्ण की सेवा को ही भक्ति समझा।
  5. माधुर्य भाव – राधा जी और गोपियों का प्रेम, जिसमें आत्मा पूरी तरह कृष्ण में लीन हो जाती है।

कृष्ण भक्ति से क्या मिलता है?

🌼 कृष्ण भक्ति से क्या मिलता है?

मन की शांति और आत्मा की पवित्रता

भय, दुख और चिंता से मुक्ति

जीवन में धैर्य, प्रेम और करुणा

भगवान श्रीकृष्ण का स्नेह और संरक्षण

🙏 अगर आप श्रीकृष्ण जी के बारे में पढ़ना चाहते हैं, तो यह अवश्य पढ़ें:

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🌸 कृष्ण भक्ति – गीता से पहला पाठ
श्रीकृष्ण की शिक्षाएँ हमें जीवन में धर्म, कर्म और भक्ति का सही मार्ग दिखाती हैं।
इस पाठ में गीता के माध्यम से सरल भाषा में कृष्ण भक्ति को समझाया गया है।


✨ बच्चों को समझाने का आसान तरीका

✨ बच्चों को समझाने का आसान तरीका

“बच्चो, कृष्ण भक्ति का मतलब है – कृष्ण को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानना।
जिस तरह तुम अपने दोस्त से अपनी हर बात कहते हो, वैसे ही हर खुशी-दुख श्रीकृष्ण से साझा करो।
वो हमेशा तुम्हारी मदद करेंगे।” 🌸


📌 सनातन संस्कार विद्या गुरुकुलम की दृष्टि से

📌 सनातन संस्कार विद्या गुरुकुलम की दृष्टि से

सनातन संस्कार विद्या गुरुकुलम में कृष्ण भक्ति को इस रूप में सिखाया जाता है –

गीता श्लोक और कहानियों के माध्यम से

भजन और कीर्तन के जरिए

कला और चित्रकला द्वारा कृष्ण लीलाओं को समझाकर

बच्चों को प्रेम, सेवा, मित्रता और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देकर

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