भगवद् गीता अध्याय 18 – माता-पिता और बच्चों के लिए महत्व


भगवान श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि पालन-पोषण का अर्थ केवल सुविधा देना नहीं,

🕉 प्रस्तावना


🌸 माता-पिता के लिए संदेश

भगवान श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि पालन-पोषण का अर्थ केवल सुविधा देना नहीं,
बल्कि बच्चों में संस्कार, संयम और सत्यनिष्ठा जगाना है।
माता-पिता यदि अपने कर्म को प्रेम से निभाएँ, तो वही बच्चों की पहली गीता बन जाती है।


🌼 बच्चों के लिए संदेश

अर्जुन की तरह बच्चों को भी अपने “विद्यार्थी धर्म” को निभाना चाहिए —
ईमानदारी, समयपालन और श्रद्धा से पढ़ना।
भगवद गीता कहती है — “कर्मण्येवाधिकारस्ते” — यानी मेहनत करो, फल की चिंता मत करो।


🌻 जीवन के पाँच सूत्र

  1. कर्तव्य सर्वोपरि है
  2. त्याग का अर्थ भागना नहीं, समझना है
  3. सेवा ही सच्ची भक्ति है
  4. भक्ति और कर्म साथ चलें
  5. भगवान पर विश्वास रखो, परिणाम स्वयं सुधरेंगे

💫 प्रेरक कहानी

एक माँ हर रात बेटे को गीता का श्लोक सुनाती थी।
सालों बाद कठिन समय में वही श्लोक बेटे को संभाल गया —
“कर्म कर, फल की चिंता मत कर।”
👉 यह दिखाता है कि बाल्यावस्था के संस्कार जीवनभर काम आते हैं।


🪷 निष्कर्ष

अध्याय 18 हमें सिखाता है कि घर को संस्कार गुरुकुल बनाइए,
जहाँ माता-पिता शिक्षक हों और बच्चे अर्जुन।
यदि हर परिवार गीता के इन सिद्धांतों को अपनाए,
तो जीवन में शांति, प्रेम और धर्म स्थायी रहेंगे।


ॐ नमः पार्वतीपतये हर हर महादेव।


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