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भगवद् गीता अध्याय 18 – माता-पिता और बच्चों के लिए महत्व

🕉 प्रस्तावना 🌸 माता-पिता के लिए संदेश भगवान श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि पालन-पोषण का अर्थ केवल सुविधा देना नहीं,बल्कि बच्चों में संस्कार, संयम और सत्यनिष्ठा जगाना है।माता-पिता यदि अपने कर्म को प्रेम से निभाएँ, तो वही बच्चों की पहली गीता बन जाती है। 🌼 बच्चों के लिए संदेश अर्जुन की तरह बच्चों को भी अपने […]

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🕉 शिव चालीसा — पहला दोहा और पहली चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला ।सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।कानन कुण्डल नागफनी के ॥ 🌸 बच्चों के लिए सरल अर्थ प्यारे बच्चो,यहाँ कवि तुलसीदास जी भगवान शिव की स्तुति कर रहे हैं।वे कहते हैं —“हे माँ पार्वती के पति, हे दीन-दुखियों पर दया करने वाले महादेव!आप हमेशा अपने भक्तों और संतों

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🌸 भगवद् गीता अध्याय 17 – श्रद्धा के तीन प्रकार (बच्चों और अभिभावकों के लिए जीवन पाठ)

🕉 परिचय: भगवद् गीता का 17वाँ अध्याय “श्रद्धात्रय विभाग योग” कहलाता है —अर्थात श्रद्धा के तीन प्रकारों का योग।इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि हर मनुष्य की श्रद्धा उसकी प्रकृति (स्वभाव) के अनुसार होती है।जिस प्रकार भोजन, पूजा, और वाणी में अंतर होता है, उसी प्रकार हमारी श्रद्धा भी तीन गुणों

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🌕 कार्तिक मास का क्या महत्व

✍ लेखक – मोनिका 🌸 Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam “हर घर गुरुकुल – Ancient Wisdom, Modern Learning” 🌺 प्रस्तावना – कार्तिक मास: पुण्य, प्रेम और प्रभु भक्ति का महीना सनातन धर्म में वर्ष के बारह महीनों में प्रत्येक माह का एक विशेष आध्यात्मिक महत्त्व बताया गया है।इनमें कार्तिक मास को सबसे पवित्र, पुण्यदायी और मोक्षदायी

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🌕 कार्तिक मास का महत्व

Author: MonikaPresented by: Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam 🌸 प्रस्तावना नमस्कार प्यारे बंधुओं, माताओं-पिताओं और बाल भक्तों!सनातन धर्म के बारह मासों में कार्तिक मास को सबसे पवित्र और पुण्यदायक माना गया है।यह मास न केवल पूजा-अर्चना का समय है, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति की गहराई को अनुभव करने का अवसर भी है। भगवान श्रीविष्णु, माँ

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की मुख्य शिक्षाएँ सरल भाषा में छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाना

🎯 उद्देश्य – इस ब्लॉग का क्या उद्देश्य है? पाठ 11 की मुख्य शिक्षाएँ सरल भाषा में छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचाना एक कहानी के माध्यम से जीवन में उन शिक्षाओं का उपयोग दिखाना अभिभावकों को यह मार्गदर्शन देना कि कैसे ये शिक्षाएँ बच्चों के चरित्र निर्माण में सहायक हो सकती हैं SEO-अनुकूल लेख बनाना

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भगवद गीता अध्याय 8 – अक्षर ब्रह्म योग

(बच्चों और आध्यात्मिक पालन-पोषण के लिए विशेष ब्लॉग)Author: Monika | Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam ✨ प्रस्तावना भगवद गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्धभूमि में जो ज्ञान दिया, वही आज हर माता-पिता और बच्चे के लिए मार्गदर्शक है। गीता का अध्याय 8 – अक्षर ब्रह्म

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भगवद गीता अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग) | बच्चों और Spiritual Parenting के लिए जीवन की शिक्षा – Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam

✨ प्रस्तावना भगवद गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्धभूमि में जो ज्ञान दिया, वही आज हर माता-पिता और बच्चे के लिए मार्गदर्शक है। गीता का अध्याय 8 – अक्षर ब्रह्म योग हमें जीवन और मृत्यु का रहस्य, आत्मा की अमरता और भगवान स्मरण की

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भगवद गीता का छठा अध्याय – माता-पिता और बच्चों के लिए महत्व

भूमिका भगवद गीता जीवन का शाश्वत ग्रंथ है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने न केवल अर्जुन को धर्म और कर्तव्य का बोध कराया, बल्कि हर इंसान को जीवन जीने की सही दिशा भी बताई।छठा अध्याय “ध्यान योग” कहलाता है। यह अध्याय मनुष्य के आंतरिक अनुशासन, साधना, संयम और आत्मिक शांति के महत्व को प्रकट करता है।

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भगवद्गीता अध्याय 4 (ज्ञान–कर्म–संन्यास योग) का बच्चों और माता-पिता के लिए महत्व | Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam

🪔 परिचय श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाली एक दार्शनिक पुस्तक है। महाभारत युद्धभूमि पर अर्जुन जब भ्रमित और निराश हो गया, तब श्रीकृष्ण ने उसे कर्म, भक्ति और ज्ञान का उपदेश दिया। गीता का चौथा अध्याय – ज्ञान–कर्म–संन्यास योग – बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए विशेष

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