भगवद गीता

भगवद् गीता अध्याय 18 – माता-पिता और बच्चों के लिए महत्व

🕉 प्रस्तावना 🌸 माता-पिता के लिए संदेश भगवान श्रीकृष्ण सिखाते हैं कि पालन-पोषण का अर्थ केवल सुविधा देना नहीं,बल्कि बच्चों में संस्कार, संयम और सत्यनिष्ठा जगाना है।माता-पिता यदि अपने कर्म को प्रेम से निभाएँ, तो वही बच्चों की पहली गीता बन जाती है। 🌼 बच्चों के लिए संदेश अर्जुन की तरह बच्चों को भी अपने […]

भगवद् गीता अध्याय 18 – माता-पिता और बच्चों के लिए महत्व Read More »

🌸 भगवद् गीता अध्याय 17 – श्रद्धा के तीन प्रकार (बच्चों और अभिभावकों के लिए जीवन पाठ)

🕉 परिचय: भगवद् गीता का 17वाँ अध्याय “श्रद्धात्रय विभाग योग” कहलाता है —अर्थात श्रद्धा के तीन प्रकारों का योग।इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि हर मनुष्य की श्रद्धा उसकी प्रकृति (स्वभाव) के अनुसार होती है।जिस प्रकार भोजन, पूजा, और वाणी में अंतर होता है, उसी प्रकार हमारी श्रद्धा भी तीन गुणों

🌸 भगवद् गीता अध्याय 17 – श्रद्धा के तीन प्रकार (बच्चों और अभिभावकों के लिए जीवन पाठ) Read More »

भगवद गीता अध्याय 8 – अक्षर ब्रह्म योग

(बच्चों और आध्यात्मिक पालन-पोषण के लिए विशेष ब्लॉग)Author: Monika | Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam ✨ प्रस्तावना भगवद गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्धभूमि में जो ज्ञान दिया, वही आज हर माता-पिता और बच्चे के लिए मार्गदर्शक है। गीता का अध्याय 8 – अक्षर ब्रह्म

भगवद गीता अध्याय 8 – अक्षर ब्रह्म योग Read More »

भगवद गीता अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग) | बच्चों और Spiritual Parenting के लिए जीवन की शिक्षा – Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam

✨ प्रस्तावना भगवद गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्धभूमि में जो ज्ञान दिया, वही आज हर माता-पिता और बच्चे के लिए मार्गदर्शक है। गीता का अध्याय 8 – अक्षर ब्रह्म योग हमें जीवन और मृत्यु का रहस्य, आत्मा की अमरता और भगवान स्मरण की

भगवद गीता अध्याय 8 (अक्षर ब्रह्म योग) | बच्चों और Spiritual Parenting के लिए जीवन की शिक्षा – Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam Read More »

भगवद गीता का छठा अध्याय – माता-पिता और बच्चों के लिए महत्व

भूमिका भगवद गीता जीवन का शाश्वत ग्रंथ है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने न केवल अर्जुन को धर्म और कर्तव्य का बोध कराया, बल्कि हर इंसान को जीवन जीने की सही दिशा भी बताई।छठा अध्याय “ध्यान योग” कहलाता है। यह अध्याय मनुष्य के आंतरिक अनुशासन, साधना, संयम और आत्मिक शांति के महत्व को प्रकट करता है।

भगवद गीता का छठा अध्याय – माता-पिता और बच्चों के लिए महत्व Read More »

भगवद्गीता अध्याय 4 (ज्ञान–कर्म–संन्यास योग) का बच्चों और माता-पिता के लिए महत्व | Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam

🪔 परिचय श्रीमद्भगवद्गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाली एक दार्शनिक पुस्तक है। महाभारत युद्धभूमि पर अर्जुन जब भ्रमित और निराश हो गया, तब श्रीकृष्ण ने उसे कर्म, भक्ति और ज्ञान का उपदेश दिया। गीता का चौथा अध्याय – ज्ञान–कर्म–संन्यास योग – बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए विशेष

भगवद्गीता अध्याय 4 (ज्ञान–कर्म–संन्यास योग) का बच्चों और माता-पिता के लिए महत्व | Sanatan Sanskaar Vidya Gurukulam Read More »